Thursday, June 19, 2014

काश ये होता, काश वो होता

नंगे पाव चलता इन्सान को लगता है
.
कि

"चप्पल होते तो कितना अच्छा होता"
.
बाद मेँ,
"
साइकिल होती तो कितना अच्छा होता"
.
उसके बाद,
"
मोपेड होता तो थकान नही लगती"
.
बद मेँ सोचता है
"
मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँ
रास्ता कट जाता"
.
फिर ऐसा लगता है,
"
कार होती तो धुप नही लगती"
.
फिर लगता है कि,
"
हवाई जहाज होती तो इन ट्राफिक कि जंजट नही होती"
.
जब हवाई जहाज मेँ बेठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदान
देखता है तो सोचता है,कि

"नंगे पाव घास मेँ चलता तो दिल को कितनी तसल्ली मिलती"
.
.
""
जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।
.
क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है;

और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है""

 

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