Sunday, July 27, 2014

जीवन जियें - अच्छे दिन सब यहीं हैं

कभी कभी आप अपनी जिंदगी से असंतुष्ट, निराश ओर परेशान हो जाते हैं, जबकि दुनिया में उसी समय कुछ लोग आपकी जैसी जिंदगी जीने का सपना देख रहे होते हैं।

घर पर खेत में खड़ा बच्चा आकाश में उड़ते हवाई जहाज को देखकर उड़ने का सपना देख रहा होता है, परंतु उसी समय हवाई जहाज का पायलट खेत ओर बच्चे को देख घर लौटने का सपना देख रहा होता है।

यही जिंदगी है। जो तुम्हारे पास हे उसका मजा लो।

अगर धन-दौलत रूपया पैसा ही खुशहाल होने का सीक्रेट होता, तो अमीर लोग सड़कों पर नाचते दिखाई पड़ते, लेकिन सिर्फ गरीब बच्चे ऐसा करते दिखाई देते हैं।

अगर पाॅवर (शक्ति) मिलने से सुरक्षा आ जाती तो नेता अधिकारी बिना सिक्युरिटी के नजर आते, उन्हें धमकियाँ नहीं मिलती, उन्हें बेचैनी नहीं होती। परन्तु जो सामान्य जीवन जीते हैं, वे चैन की नींद सोते हैं।

अगर खुबसुरती और प्रसिद्धि मजबूत रिश्ते कायम कर सकती तो सेलीब्रिटीज् की शादियाँ सबसे सफल होती।

इसलिए दोस्तों, इसकी उसकी देखा देखी में ना पड़े...यह जिंदगी सभी के लिए अत्यंत खुबसुरत है...इसको जी भरकर जीयों, इसका भरपूर लुत्फ़ उठाओ...क्योंकि जिदंगी ना मिलेगी दोबारा...

सामान्य जीवन जियें...
विनम्रता से चलें और
ईमानदारी पूर्वक प्यार करें...

स्वर्ग, अप्सराएँ, अच्छे दिन सब यहीं हैं...

Live Simply,
Walk Humbly...&
Love genuinely...the heaven is here only.

" विनम्र विनती "

धरती को उसके जेवरों से सजाइए, एक ° पौधा °अवश्य लगाइए।
Plant a Tree...#Go Green!!!

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Tuesday, July 22, 2014

बहानो की अर्थी या सफलता का जनाजा

बहानो की अर्थी या सफलता का जनाजा चुनिए ?

1 - मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला

अचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।

2- बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था

प्रख्यात संगीतकार ए . आर . रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था।

3 - मै अत्यंत गरीब घर से हू

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे ।

4- बचपन से ही अस्वस्थ था

आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।

5 -मैने साइकिल पर घूमकर आधी जिंदगी गुजारी है

निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी जिन्दगी गुजारी ।

6- एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी

प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।

7 - मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है

थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जाता था।

8 - मै इतनी बार हार चूका अब हिम्मत नही

अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।

9 - मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी

लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।

10 - मेरी लंबाई बहुत कम है

सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।

11 - मै एक छोटी सी नौकरी करता हू इससे क्या होगा

धीरु अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे।

12 - मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है , अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा

दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है ।

13 - मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है , अब क्या कर पाऊगा

डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।

14 - मेरी उम्र बहुत ज्यादा है

विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।

15 - मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है

जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आइडिये को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है ।

16 - मेरे पास धन नही

इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।

17 - मुझे ढेरो बिमारिया है

वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो मे थे | राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे।

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कुछ लोग कहेगे कि यह जरुरी नही कि जो प्रतिभा इन महानायको मे थी , वह हम मे भी हो !!!

सहमत हू मै लेकिन यह भी जरुरी नही कि जो प्रतिभा आपके अंदर है वह इन महानायको मे भी हो !!!

सार यह है कि 

" आज आप जहा भी है या कल जहाँ भी होगे इसके लिए आप किसी और को 
जिम्मेदार नही ठहरा सकते , इसलिए आज चुनाव करिये " सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने
???

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Friday, July 18, 2014

देखें अंतर की ओर

Jainism Sansar - dekhe antar ki aur
Jio aur jine Do
कबूतर के एक जोड़े ने अपने लिए घोंसला बनाया. परंतु जब कबूतर जोड़े उस घोंसले में रहते तो अजीब बदबू आती रहती थी.
उन्होंने उस घोंसले को छोड़ कर दूसरी जगह एक नया घोंसला बनाया. मगर स्थिति वैसी ही थी. बदबू ने यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ा.
परेशान होकर उन्होंने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया और नए मोहल्ले में घोंसला बनाया. घोंसले के लिए साफ सुथरे तिनके जोड़े. मगर यह क्या! इस घोंसले में भी वही, उसी तरह की बदबू आती रहती थी.
थक हार कर उन्होंने अपने एक बुजुर्ग, चतुर कबूतर से सलाह लेने की ठानी और उनके पास जाकर तमाम वाकया बताया.चतुर कबूतर उनके घोंसले में गया, आसपास घूमा फिरा और फिर बोला – "घोंसला बदलने से यह बदबू नहीं जाएगी. बदबू घोंसले से नहीं, तुम्हारे अपने शरीर से रही है. खुले में तुम्हें अपनी बदबू महसूस नहीं होती, मगर घोंसले में घुसते ही तुम्हें यह महसूस होती है और तुम समझते हो कि बदबू घोंसले से रही है. अब जरा अपने आप को साफ करो.दुनिया जहान में खामियाँ निकालने और बदबू ढूंढने के बजाए अपने भीतर की खामियों और बदबू को हटाएँ. दुनिया सचमुच खूबसूरत, खुशबूदार हो जाएगी

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Seva kya hai? | सेवा क्या है?

🌲सेवा क्या है? 🌲 सेवा कर्म काटने का माध्यम है। सेवा आपके मन को विनम्र बनाती है। तन को चुस्त रखती है। मन में स्थिरता का माहौल पैदा करती...