Thursday, February 26, 2015

आधा सच

आजकल वाट्स एप पर एक मेसेज बहुत चल रहा हैं कि
एक बुज़ुर्ग मोबाइल वाले से कहता है कि मेरा फोन ख़राब है।
दुकानदार बताता है कि आपका फोन ठीक है।
बुज़ुर्ग आँखों में आंसू लिए कहता है कि फिर मेरे बच्चो के फोन क्यों नही आ रहे।
इसके आगे का मेसेज पढ़िए
फिर वो दुकानदार बैलेंस चेक करता है तो पाता है कि बुज़ुर्ग के फोन में 500 का बैलेंस है।
दुकानदार बुज़ुर्ग के फोन से उनके बेटे/बेटी को फोन लगाता है और सारा घटनाक्रम सुनाता हैतब उस बुज़ुर्ग का बेटा/बेटी दुकानदार से उनसे बात कराने को कहता है
और बुज़ुर्ग से कहता/कहती है कि

पापा मैंने आपको फोन इसलिए दिया है ताकि आप जब चाहे जिस समय चाहे मुझे फोन कर सके। कोई तकलीफ हो तो बता सके। इसलिए नही कि आप मेरी मर्जी हो तभी मुझसे बात कर सके। अगर मुझे आपसे बात करने में परेशानी होती तो मै आपको फोन क्यों देता/देती।
पापा आपके संस्कार हमारी रगों में है। हम किसी विदेशी सभ्यता या संस्कार वाले देश के बच्चे नही हैं।
हम भारतीय हैं। हम अपने बुजुर्गो का सम्मान करना जानते हैं।मैं मानता/मानती हु कि काम क़ी व्यस्तता होने के कारन आपसे कभी कभी खुद बातचीत नही कर पाते। क्युकी अपने कामके प्रति पूरा समर्पण भाव भी मैंने आपसे ही सीखा है। तो फिर आपका दिल दुखाने का मैं कैसे सोच सकता/ सकती हू।

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गर्व से कहो हम भारतीय है
#A24Mं
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