Saturday, February 17, 2018

तिथि किसे कहेते है।

जीव अकेला आता है और अकेले जाता है उसे *एकम* कहेते हैं।

जीव दो प्रकार का धर्म का पालन करता है उसे *बीज* कहेते हैं।

जीव देव-गुरु-धर्म कि आराधना करता है उसे *त्रीज* कहेते हैं।

जीव दान,,शील,, तप,, और भाव आदरता है उसे *चोथ* कहेते हैं।

जीव पाँच इन्द्रियों को वश में रखता है उसे *पाँचम* कहेते है।

जीव छ: काय के जिवोकी रक्षा करता है उसे *छठ्ठ* कहेते हैं।

जीव सात कुव्यसन को त्यागता है उसे *सातम* कहेते है।

जीव आठ प्रकार के कर्मो को खपाने का प्रयत्न करता है उसे *आठम* कहेते हैं।

जीव ब्रह्मचर्य के नव-वाड पालन करनेका प्रयत्न करता है उसे नम या *नवम* कहेते हैं।

जीव दस प्रकार के यति धर्म की अनुमोदना करता है उसे *दसम* कहेते हैं।

जीव श्रावक की ग्यारह पडिमा धारे उसे *अगियारस* कहेते हैं।

जीव बारह प्रकार की भावना भाये उसे *बारस* कहेते हैं।

जीव तेरह काठिया दूर करने का प्रयत्न करे उसे *तेरस* कहेते हैं।

जीव चौदह नियमों का पालन करे उसे *चौदस* कहेते हैं।

जीव पंद्रह भेदे शुद्ध नियम पाले उसे *पुनम* कहेते है।

Seva kya hai? | सेवा क्या है?

🌲सेवा क्या है? 🌲 सेवा कर्म काटने का माध्यम है। सेवा आपके मन को विनम्र बनाती है। तन को चुस्त रखती है। मन में स्थिरता का माहौल पैदा करती...