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| 18 श्री अरहनाथ जी | 19 श्री मल्लिनाथ जी | 20 श्री मुनिसुव्रत जी |
सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जन्म से जैन होना भी सौभाग्य की बात है, पर उससे भी परम सौभाग्य की बात है.. जीवन में दया, क्षमा, सत्य, शील, संतोष, सदाचार आदि जैनत्व के संस्कार आना
| 18 श्री अरहनाथ जी | 19 श्री मल्लिनाथ जी | 20 श्री मुनिसुव्रत जी |
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