दर्शनं देव देवस्य, दर्शनं पाप नाशनं,
दर्शनं स्वर्ग सोपानं, दर्शनं मोक्ष साधनं।।
सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जन्म से जैन होना भी सौभाग्य की बात है, पर उससे भी परम सौभाग्य की बात है.. जीवन में दया, क्षमा, सत्य, शील, संतोष, सदाचार आदि जैनत्व के संस्कार आना
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