सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जन्म से जैन होना भी सौभाग्य की बात है, पर उससे भी परम सौभाग्य की बात है.. जीवन में दया, क्षमा, सत्य, शील, संतोष, सदाचार आदि जैनत्व के संस्कार आना
सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जन्म से जैन होना भी सौभाग्य की बात है, पर उससे भी परम सौभाग्य की बात है.. जीवन में दया, क्षमा, सत्य, शील, संतोष, सदाचार आदि जैनत्व के संस्कार आना
प्रभु दर्शन सुख सम्पदा, प्रभु दर्शन नवनिध्।
प्रभु दर्शन थी पमिये, सकल पदारथ सिद्ध।।
Prabhu darshan sukh sampada, prabhu darshan nava nidh
Prabhu darshan thi pamiea, sakal padhaaratha siddha
नमो जिणाणम नमो जिणाणम नमो जिणाणम
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