Wednesday, March 26, 2014

God see Intention not Presentation

पापा: बेटा आप मेरे साथ मंदिर आकर क्या करोगे ?
आपको प्रार्थना नहीं आती है.
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फिर भी बेटा पापा के साथ मंदिर गया

उसके पापा मंदिर में प्रार्थना …  स्तुतिस्तवन करने लगे।
तभी उन्होंने देखा कि उनका बेटा भी कुछ बोल रहा है।
बहार आकर पापा ने बेटे से पूछा - आपको तो प्रार्थना  …  स्तुतिस्तवन कुछ भी नहीं आते।
तो आप मंदिर में क्या बोल रहे थे??

बेटा  - मेने पूरी हिंदी वर्ण माला बार बोली और भगवन से कह दिया कि इसमे से आप आपकी प्रार्थना बना लेना।

बेटे का जवाब सुन कर पापा कि आँख भर आई।

" शब्दो कि प्रार्थना तो हम अनेक बार कि होगी पर प्रार्थना में भाव होना जरूरी है।"

पापा के पास शब्दो कि प्रार्थना थी परन्तु बच्चे कि प्रार्थना में भाव थे।
God see Intention not Presentation
God see Intention not Presentation

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Prabhu Intention dekhta hai Presentation nahi

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Papa: beta aap mere saath mandir aake kya karoge?
Aapko Prathna to aati nahi...
Phir bhi beta papa ke saath mandir gaya..
Uske papa mandir mei prathna..stuti...stavan karne lage
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Tabhi unhone dekha ki unka beta bhi kuch bol raha hai.....
Bahar aake papa ne bete se pucha...aapko to prathna. ..stuti ..stavan kuch bhi nahi aata to aap mandir mei kya bol rahe the...
Beta: papa meine puri a  to z  5times bola n bhagwan ko keh diya ki isme se aap apni prathna bana lena..
Bete ka jawab sunkar papa ki aankh bhar aayi..
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Shabd ki prathna to humne anek bar ki hogi par prathna mei bhav hona jaruri hai...
Papa ke pass shabd ki prathna thi par bacchhe ki prathna mei bhav the...
Prabhu Intention dekhta hai Presentation nahi...

Monday, March 17, 2014

तेरा यहाँ कुछ भी नहीं

एक आदमी मर गया| जब उसे महसूस हुआ तो उसने
देखा कि भगवान उसके पास रहे हैं और उनके हाथ में एक सूट केस है|
भगवान ने कहा~पुत्र चलो अब समय हो गया|
○○○आश्चर्यचकित होकर○○○
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आदमी ने जबाव दिया~ अभी इतनी जल्दी?
अभी तो मुझे बहुत काम करने हैं, मैं क्षमा चाहता हूँ,
किन्तु अभी चलने का समय नहीं है|
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आपके इस सूट केस में क्या है?
भगवान ने कहा~ तुम्हारा सामान|
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मेरा सामान? आपका मतलब है, कि मेरी वस्तुएं, मेरे कपडे, मेरा धन?
भगवान ने प्रत्युत्तर में कहा~ये वस्तुएं तुम्हारी नहीं हैं, ये तो पृथ्वी से सम्बंधित हैं|
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आदमी ने पूछा~ मेरी यादें?
भगवान ने जबाव दिया ~ वे तो कभी भी तुम्हारी नहीं थीं, वे तो समय की थीं|
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फिर तो ये मेरी बुद्धिमत्ता होंगी?
भगवान ने फिर कहा~ वह तो तुम्हारी कभी भी नहीं थीं, वे तो परिस्थिति जन्य थीं|
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तो ये मेरा परिवार और मित्र हैं?
भगवान ने जबाव दिया~ क्षमा करो वे तो कभी भी तुम्हारे नहीं थे, वे तो राह में मिलने वाले पथिक थे|
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फिर तो निश्चित ही यह मेरा शरीर होगा?
भगवान ने मुस्कुरा कर कहा~ वह तो कभी भी तुम्हारा नहीं हो सकता क्योंकि वह तो राख है|
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तो क्या यह मेरी आत्मा है?
भगवान ने कहा~ नहीं वह तो मेरी है|
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○○○भयभीत होकर आदमी ने भगवान के हाथ से सूट केस ले लिया और उसे खोल दिया यह देखने के लिए कि सूट केस में क्या है| वह सूट केस खाली था|
○○○आदमी की आँखों में आंसू गए और...
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उसने कहा~ मेरे पास कभी भी कुछ नहीं था|

■■■भगवान ने जबाव दिया~ यही सत्य है, प्रत्येक क्षण जो तुमने जिया, वही तुम्हारा था|
जिंदगी क्षणिक है और वे ही क्षण तुम्हारे हैं|
इस कारण जो भी समय आपके पास है, उसे भरपूर जियें|
आज में जियें, अपनी जिंदगी जिए|
खुश होना कभी भूलें, यही एक बात महत्त्व रखती है|
भौतिक वस्तुएं और जिस भी चीज के लिए आप यहाँ लड़ते हैं, मेहनत करते हैं|
आप यहाँ से कुछ भी नहीं ले जा सकते हैं||||
तेरा यहाँ कुछ भी नहीं
तेरा यहाँ कुछ भी नहीं 

Wednesday, March 12, 2014

Surya Tilak - सूर्य तिलक

'Surya Tilak' is a unique event in which sun rays appear on the forehead of Mahavir Swami, at KOBA Jain Temple exactly at 2.07 pm on every 22nd of May. 'Surya Tilak' continues for Seven minutes. The large numbers of devotees remain present at this tirth to witness this event every year.

 

On May 22, Acharya Shree Kailashsagar Suriswarji had spent their last moment in Koba Mahavir Jain Aradhana Kendra. Since then Acharya Shree Padmasagar Suriswarji pioneered to worship Lord Mahavir by Surya Tilak.

 

There is no magic, but such Surya Tilak has been made possible with the perfect use of Mathematics, Astronomy and traditional knowledge of sculpture. This unbelievable and effective calculations which has created "SURYA TILAK" at every year has calculated by Ganivarya Shree Arvindsagarji Maharaj Saheb.

 

Source: http://www.jainpanchang.org/panchangganit_author.html

 

 

Friday, March 7, 2014

15 अद्भुत बातें - जिंदगी के हर मोड़ पर

जिंदगी के हर मोड़ पर काम आने वाली 15 अद्भुत बातें 
Jainism Sansar
Jainism Sansar

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1.गुण - हो तो रूप व्यर्थ है.
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2. विनम्रता- हो तो विद्या व्यर्थ है.
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3. उपयोग आए तो धन व्यर्थ है.
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4. साहस हो तो हथियार व्यर्थ है.
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5. भूख- हो तो भोजन व्यर्थ है.
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6. होश- हो तो जोश व्यर्थ है.
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7. परोपकार- करने वालों का जीवन व्यर्थ है.
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8. गुस्सा- अक्ल को खा जाता है.
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9. अहंकार- मन को खा जाता है.
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10. चिंता- आयु को खा जाती है.
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11. रिश्वत- इंसाफ को खा जाती है.
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12. लालच- ईमान को खा जाता है.
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13. दान- करने से दरिद्रता का अंत हो जाता है.
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14. सुन्दरता- बगैर लज्जा के सुन्दरता व्यर्थ है..
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15. सूरत- आदमी की कीमत उसकी सूरत से नहीं बल्कि सीरत यानी गुणों से लगानी चाहिये.
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पसंद आये तो शेअर जरुर कीजिएगा !

Seva kya hai? | सेवा क्या है?

🌲सेवा क्या है? 🌲 सेवा कर्म काटने का माध्यम है। सेवा आपके मन को विनम्र बनाती है। तन को चुस्त रखती है। मन में स्थिरता का माहौल पैदा करती...