संपूर्ण विश्व में एकमात्र
जैन धर्मं ही
इस बात में
आस्था रखता हैं
की प्रत्येक आत्मा
में परमात्मा बनने
की शक्ति विद्यमान
हैं. अर्थात भगवन
महावीर स्वामी की तरह
ही प्रत्येक व्यक्ति
जैन धर्मं का
ज्ञान प्राप्त करके
उसमे सच्ची आस्था
रखकर, उस अनुसार
आचरण (कर्म) करके
बड़े पुण्योदय से
उसे प्राप्त दुर्लभ
मानव योनी का
'एक मात्र सच्चा
व अंतिम सुख'
संपूर्ण जीवन जन्मा-मरण के
बंधन से मुक्त
होने वाले कर्म
करते हुए मोक्ष
महाफल पाने हेतु
कदम बढ़ाना तथा
उसे प्राप्त कर
वीर महावीर बन
दुर्लभ जीवन की
सार्थक कर सकता
है
सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जन्म से जैन होना भी सौभाग्य की बात है, पर उससे भी परम सौभाग्य की बात है.. जीवन में दया, क्षमा, सत्य, शील, संतोष, सदाचार आदि जैनत्व के संस्कार आना

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