Thursday, July 9, 2015

Suvichar - कमियाँ घातक नहीं

कमियाँ घातक नहीं;
उनसे हार जाना हमारे लिए घातक होता है।
डट कर मुकाबला कीजिये अपनी कमियों के साथ;
सफलता जरूर आपके कदम चूमेंगी।।
सुविचार - जैनिज़्म संसार
#suvichar #jainismSansar #jain #jainism
www.fb.com/jainismSansar

Friday, July 3, 2015

मणिभद्र वीर जी - इतिहास

उज्जैन शहर के भेरुगढ़ में श्री विक्रमादित्य कि 15वीं शताब्दी में वि.स. 1541 बसंत पंचमी के शुभ दिन श्रेष्ठीवर्य सुश्रावक धर्मप्रिय एवम सुश्राविका जिनप्रिया कि इसी जगह स्थित हवेली में एक पुत्र रत्न का जन्म हुआ जिसका नाम माणक चन्द्र रखा गया | इसी घर में पद्मावती माता का घर देरासर भी था | शेरावकाल पूर्ण करके जब योवन अवस्था में उन्होंने कदम रखा धारानगरी के भीमसेठ कि पुत्री आनंदरति के साथ उन्हें विवाह के बंधनो में बांध दिया एक बार उज्जैन में लोकशाह पंथ के साधुओं का आगमन हुआ माणकचंद्र उनके संपर्क में आकर मूर्ति पूजा से विमुख हो गया इस घटना से माँ को बहुत दुःख हुआ | जब उनकी माँ को ओलीजी का पारणा था तब माँ ने यह प्रतिज्ञा ली की जब तक माणक सन्मार्ग पार नहीं आयेगा तब तक घी का त्याग करा | इस प्रकार छ: माह व्यतित हुए | इधर उज्जैन नगरी के  बाहर बगीचे में आचार्य श्री आनंद विमलसुरिजी पधारे माता के आग्रह से माणक आचार्य श्री के पास गया और देखा कि आचार्य श्री कायोत्सर्ग ध्यान में लीन है उनकी परीक्षा हेतु माणक ने जलती हुई लकड़ी से उनकी दाड़ी जला दी फिर भी आचार्य श्री ने क्षमा करा | माणक को अपनी भुल का एहसास हुआ और किये हुए पाप कि क्षमा याचना की आचार्य श्री ने माणक कि मूर्ति पुजा सम्बन्धी समस्त शंकाओ का निवारण किया और महासुदी पंचमी के शुभदिन उन्होंने सद्धर्म को अपनाया एवं बारह व्रतों को धारण किया | वहा से विहार कर के आचार्य श्री आगरा पधारे  | संयोग से माणकचंद| भी अपने व्यापर हेतु  आगरा गये वहा गुरुदेव के मुख से शत्रुंजय तीर्थ की महिमा सुनकर उन्होंने संकल्प किया जब तक शत्रुंजय तीर्थ कि यात्रा नहीं करूँगा तब तक अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा वहां से यात्रा हेतु प्रस्थान किया | चलते चलते मगरवाडा के घनघोर जंगल में पहुचे वहां पार डाकुओ ने उनको व्यापारी समझकर घेर लिया और तलवार से प्रहार किया जिससे इनके शरीर के तीन हिस्से हुए प्रथम हिस्सा धड़ गिरा आगलोड में , दूसरा हिस्सा पिंडी गिरी मगरवाडा में एवं मस्तक उछलकर जन्म स्थली उज्जैन (भेरुगढ़)  में गिरा | सेठ अंतिम समय में शत्रुंजय के शुभ ध्यान से मरकर व्यंतर निकाय में मणिभद्र देव बने जो एकावतरी तथा सम्यक दृष्टी देव है जो एरावत हाथी पार विराजमान है | कुछ समय के बाद इधर अचानक आचार्य श्री आनंदविमलसुरीजी के साधुओं परकिसी ने मेली विद्या का प्रयोग किया जिससे चित भ्रमित हो कर साधुओं का कालधर्म होने लगा | आचार्य श्री ने जब ध्यान लगाया तो अधिष्ठायक देव ने दिव्य संकेत दिया कि आप गुजरात में मगरवाडा गाँव में जाकर अष्ठम ताप पूर्वक साधना करोगे तो यह उपद्रव मिट जावेगा | गुरुदेव वहां पहुचे उनके ध्यान व तप के प्रभाव से मणिभद्र जी साक्षात प्रकट हुए और अपना परिचय दिया कि मैं वही माणक चंद सेठ हूं शुभ ध्यान पुर्वक मृत्यु पाकर मैं मणिभद्र देव के रूप में उत्पन्न हुआ हु | फिर गुरुदेव के मुख से उपद्रव कि बात सुनकर उपद्रवकारी काला गोरा भैरव के साथ युद्ध करके उन्हें परास्त किया व भविष्य में मुनि हत्या न करने की उन्हें प्रतिज्ञा दी | फिर गुरुदेव से विनती करी की मेरी जागृति के लिये आप तपागच्छ के उपाश्रय में मेरी स्थापना करवाइये ताकि आने वाले साधू साध्वी मुझे धर्म लाभ देते रहे और जो भी मुझे सच्चे मन से याद करेगा मैं उसकी हर मनोकामना पूर्ण करूंगा और जिन शासन की हमेशा रक्षा और सहायता करूंगा इस तरह श्री मणिभद्र यक्षराज की महासुदी पंचमी के दिन स्थापना हुई और तपागच्छ के रक्षक देव प्रसिद्ध हुए | 
जहा मस्तक गिरा था वह यही पावन स्थान है उज्जैन भेरुगढ़ में सेठ माणक चन्द्र की हवेली है जो उनकी जन्म स्थली है यहाँ जैनाचार्य श्री आनंद विमल श्री के कर कमलो से श्री मणिभद्र जी की प्रतिष्ठा हुई थी | समय के प्रवाह से यह हवेली करीब 600 सालो से काल के थपेड़े खा खाकर  जीर्ण शीर्ण हुई | वि.स. २०३९ में चारूप तीर्थ में मणिभद्र देव द्वारा दिये प्रत्यक्ष दर्शन के बाद प.पू. पन्यास प्रवर गुरुदेव श्री अभयसागर जी म.सा. के लिखित आदेश से उनके पट्टधर शिष्य प.पू. आचार्य श्री अशोक सागर सुरीश्वर जी म. सा. ने इस जन्मभूमि हवेली का जीर्णोद्धार तथा नुतन केशरियानाथ दादा के जिनालय का निर्माण करा कर वि.स. २०६६ महासुदी ग्यारस दिनांक 11 फरवरी सन 2010 को इस तीर्थ कि प्रतिष्ठा सम्पन्न कराई आज इस तीर्थ में यात्रियों के ठहर ने कि उत्तम व्यवस्था है एवं भोजनशाला चालु है कृपया तीर्थ पर पधारकर सेवा का अवसर प्रदान करें 

Shri Manibhadra ji

Wednesday, July 1, 2015

Navkar Mantra Meaning

“ नमो अरिहंताणं ”
हे अरिहंत परमात्मा !
आपने बाह्य शत्रुओं पार नहीं, आतंरिक शत्रुओं पार विजय प्राप्त की है
में भी मेरे कषायो और अवगुणों पर विजय प्राप्त कर संकू,
ऐसी मेरी साधना हो!

“ नमो सिद्धाणं ”
हे सिद्ध परमात्मा !
आपके जैसी पूर्ण निष्पापता कि अवस्था में मैं कब आ पाउँगा?
पर आज आंशिक निष्पाप जीवन शैली जी संकू,
ऐसी मेरी साधना हो!

“ नमो आयरियाणं ”
है आचार्य भगवंत !
आप ही तो हो मेरी आत्मा के अनुशासक !
आपके चरणों में रहकर आपके जैसा आचरण करू,
ऐसी मेरी साधना हो!

“ नमो उवझ्झाया उव्ज्झायाणं ”
हे उपाध्याय भगवंत !
आपकी कृपा से मेरा अप्रकट ज्ञान प्रकट हो
और मुक्ति मंजिल कि और मुझे सही दिशा व द्रष्टि मिले,
ऐसी मेरी साधना हो!

“ नमो लोए सव्वसाहूणं ”
हे सर्व साधू भगवंतों !
आपने पंच महाव्रत स्वीकार कर छठवें गुणस्थानक में स्थान प्राप्त किया है |
इस भाव में या भविष्य में मै भी मोक्ष लक्ष्य के साथ पंच महाव्रत स्वीकारू ,
ऐसी मेरी साधना हो!

mera ek sapna hai - मेरा एक सपना है

तर्ज- मेरा एक सपना है


हो मेरा एक साथी है, बड़ा ही भोला भाला हैमिले न उस जैसा वो जग से निराला हैजब - जब दिल ये उदास होता हैमेरा प्यारा दादा मेरे पास होता है- 2
हो मेरा एक साथी है _ _ _ _


                         नई – नई पहचान बदल गई रिश्ते में-2
                         प्रभुजी मेरा सौदा पट गया सस्ते में -2
                         गिरा में जब - जब भी, उसी ने संभाला है-2      
                         मिले न उस जेसा, वो जग से निराला है

जब तक रहा अकेला बड़ा दुःख पाया में,जब जब दुःख ने घेरा तो घबराया मेंकि सारी दुनिया में तेरा ही सहारा हैमिले न उस जैसा, वो जग से निराला है _ _ _ _ _ 

Friday, June 26, 2015

Suvichar - Mahavir Sandesh

खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों
शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर हैं।।
सुविचार - जैनिज़्म संसार
#jainismSansar #jain #jainism #suvichar #mahavir

Thursday, June 18, 2015

पिता | father | Poem

#fathersDay celebrated every third Sunday in the month of June
To know more visit
http://doUknowThe.blogspot.com/

Sunday, May 31, 2015

Friday, May 29, 2015

Think yourself - स्वयं विचार कीजिये

इतना मूल्यवान मनुष्य जीवन
प्राप्त करने का क्या लाभ हुआ?
स्वयं विचार कीजिये :-
,
1- शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
👍मौन होना सब से बेहतर है।

2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
👍सफेद रंग सब से बेहतर है।

3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
👍उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।

4-पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
👍पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।

5- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
👍बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।

6- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
👍अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।

7- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
👍सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है।

इंसान के अंदर जो समा जायें वो
             " स्वाभिमान "
                    और
जो इंसान के बाहर छलक जायें वो
             " अभिमान "

Saturday, May 16, 2015

Sui aur dhaga Suvichar - सुई और धागा सुविचार

सुई में वही धागा प्रवेश कर सकता है - जिसमे गांठ ना हो।।

Tuesday, May 12, 2015

Tirthankar Avantiparshavnath ji

प्रभु दर्शन सुख सम्पदा, प्रभु दर्शन नवनिध्।
प्रभु दर्शन थी पमिये, सकल पदारथ सिद्ध।।
Prabhu darshan sukh sampada, prabhu darshan nava nidh
Prabhu darshan thi pamiea, sakal padhaaratha siddha
नमो जिणाणम नमो जिणाणम नमो जिणाणम
#jainismSansar #Jain #jainism #tirthankar

Thursday, May 7, 2015

Jal pooja - जल पूजा

Jal puja jugte karo,
Mail anadi vinassh,
Jal puja fal muje hojo,
Mangu em prabhu pass.

जल पूजा जुगते करो, मेल अनादि विनाश।
जल पूजा फल मुझे होजो, मांगू एम् प्रभु पास।।

http://jainismSansar.blogspot.com
He devadi dev ! Aap to swayam nirmal he,malin to hamari atma he........
Aap ke ango par abhishek kar hum apni atama ko pavitar banana chahte he.
He nath ! Dev devendaro ki bhanti kshirsagar,ganga nadi ka jal to nahi laskte,parantu sakati ke anusar jo ye dudh hum laye he,use aap ke ango par baha kar apni atama ki malinta dur karenge.
He tribhuvan nath ! Dev devendar bhale hi aap ke janabhishek ka ayojan karte ho,parantu hum aap ke rajaybhishek ka ayojan kar rahe he,hum aaj aapko apne haruday ke rajshihashan ke raja ke roop mai udhagoshit kar rahe he.
Ye abhishek us ki goshana he.
hum anadi kal se apne haruday ke raja ke roop mai mohraja ko pujate aaye he,parantu he nath ! Is moh raja ne hume kafi taga he.
thodasa xanik shukh dekar is raja ne hume puri tarah se lut liya he.aaj hum is mohraja ko utar kar apne haruday shihashan par aapko
Virajman kar rahe he.
he dev ! Jese jese yah jaldhara aapke ango par pravahit hogi,vese hamari atama shital tatha nirmal hoti jayegi.......
he krapa sagar ! Hamari is abhishek puja ko sweekar kar aap hamari antaratama ko alankrat karo.........
Om rim srim parampurusay parmeshwaray janmjaramratunivarnay srimate jinendray jalam puja yajamahe swah......ll

Thursday, February 26, 2015

आधा सच

आजकल वाट्स एप पर एक मेसेज बहुत चल रहा हैं कि
एक बुज़ुर्ग मोबाइल वाले से कहता है कि मेरा फोन ख़राब है।
दुकानदार बताता है कि आपका फोन ठीक है।
बुज़ुर्ग आँखों में आंसू लिए कहता है कि फिर मेरे बच्चो के फोन क्यों नही आ रहे।
इसके आगे का मेसेज पढ़िए
फिर वो दुकानदार बैलेंस चेक करता है तो पाता है कि बुज़ुर्ग के फोन में 500 का बैलेंस है।
दुकानदार बुज़ुर्ग के फोन से उनके बेटे/बेटी को फोन लगाता है और सारा घटनाक्रम सुनाता हैतब उस बुज़ुर्ग का बेटा/बेटी दुकानदार से उनसे बात कराने को कहता है
और बुज़ुर्ग से कहता/कहती है कि

पापा मैंने आपको फोन इसलिए दिया है ताकि आप जब चाहे जिस समय चाहे मुझे फोन कर सके। कोई तकलीफ हो तो बता सके। इसलिए नही कि आप मेरी मर्जी हो तभी मुझसे बात कर सके। अगर मुझे आपसे बात करने में परेशानी होती तो मै आपको फोन क्यों देता/देती।
पापा आपके संस्कार हमारी रगों में है। हम किसी विदेशी सभ्यता या संस्कार वाले देश के बच्चे नही हैं।
हम भारतीय हैं। हम अपने बुजुर्गो का सम्मान करना जानते हैं।मैं मानता/मानती हु कि काम क़ी व्यस्तता होने के कारन आपसे कभी कभी खुद बातचीत नही कर पाते। क्युकी अपने कामके प्रति पूरा समर्पण भाव भी मैंने आपसे ही सीखा है। तो फिर आपका दिल दुखाने का मैं कैसे सोच सकता/ सकती हू।

बात सही लगे तो शेयर जरुर करे
गर्व से कहो हम भारतीय है
#A24Mं
🙏🌹〽💲🌹🙏

Wednesday, February 25, 2015

स्वयं विचार कीजिये | Please consider themselves

स्वयं विचार कीजिये :-


1-इतना कुछ होते हुए भी
शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
👍मौन होना सब से बेहतर है। 

2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
👍सफेद रंग सब से बेहतर है। 

3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
👍उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है। 

4-पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
👍पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है। 

5- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
👍बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है। 

6- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
👍अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है। 

7- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
👍सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतरहै।

इंसान के अंदर जो समा जायें वो
" स्वाभिमान "
और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो
" अभिमान " |

Thursday, February 19, 2015

Reaction's Action | प्रतिक्रिया की क्रिया

एक प्यारे से couple को करीब 10 साल बाद
एक
बच्ची हुई, वो सभी आपस में
खुश थे, एक दूसरे से बहुत प्यार
करते थे. और
बच्ची तो उनकी दुलारी थी.
एक सुबह, जब
बच्ची करीब कुछ
दो सालो की थी, तो पति ने टेबल
पर एक बोतल देखि जिसका ढ़क्कन खुला हुआ था.
वो काम के लिए late हो रहा था. इसलिए उसने
पत्नी को बोतल का ढ़क्कन लगाने और उसे
अलमारी में
रखने के लिए कह कर चला गया.
पत्नी जो की kitchen
में अपने काम में busy थी. वो भूल
ही गयी. उसका ध्यान
नहीं गया.
छोटी लड़की ने उस बोतल
को देखा और खेल
खेल में उसके पास जाकर उसे उठा लिया. उसके
रंगीन रंग
को देख कर खुश होते हुए उससे खेलने
लगी. और उसे
पूरा पी गयी… वो बोतल एक
दवा की थी,
जो adults के लिए वो भी कम dosages
के लिए थी.
उस दवा से बच्ची की हालत
बहुत ख़राब हो गयी.
दवा जहर की तरह असर कर
रही थी.
क्योंकि उसका छोटा सा शरीर सह
नहीं पा रहा था.. जब
उसकी माँ ने यह
देखा तो वो तुरंत उसे अस्पताल ले गयी,
जहाँ उसकी मृत्यु
हो गयी.. उसकी माँ बहुत
ही डर गयी, और सदमे में आ
गयी. वो अपने पति का सामना कैसे
करेगी.. खबर पाते
ही, पति जब आये और
अपनी बच्ची को इस हालत में
देखा तो वो सह नहीं पाए, उन्हें दर्द
हुआ. उन्होंने
अपनी पत्नी की तरफ
नजर उठा के देखा, वो सहमी हुई
थी, और कहा, “ मैं तुम्हे बहुत
ही ज्यादा चाहता हूँ.”
और पत्नी को गले लगाकर उसे सहारा दिया,
अपने बच्चे
को खोने के गम में वो बिलख पड़ी… पति के
ऐसे
reaction की उम्मीद
नहीं थी, पर उसके मन में बस
एक
बात आई. अगर वो खुद ही बोतल बंद कर
देता तो, और
अपनी पत्नी, जिसने
अभी अभी अपनी मासूम
सी बच्ची खोयी है,
उसे दिलासे की जरुरतहै, आरोप-
प्रत्यारोप से कुछ नहीं होने वाला था… उसने
वो किया जो समय और स्तिथि के
अनुरूप था. कई बार
हमारे जीवन में भी ऐसे पल आ
जाते है, जब हम आसानी से
किसी परअपना काम थोप देते है,
जबकि हम स्वयं
ही उन्हें करने के काबिल हैं. हम
दूसरो पर
असफ़लता का ठीकरा भी फोड़
देते है. और हम मौके
की नज़ाकत
को भी नहीं समझते है.
कितनी ही बार ऐसे
मौके आये है, और ऐसा फिर होगा.
पर हम उस समय
क्या करते है, ये भविष्य सुनिश्चित
करता है… कई बार
हमारे अपनों से
भी छोटी छोटी बातो पर
हमारे मत
भेद हो जाते है. चाहे माफ़ी देना हो,
या माफ़ी लेना.
ये हमारे रिश्तो को मजबूत ही करता है,
कमज़ोर नहीं.
अपनों की गलतियों को अगर माफ़ कर
दिया जाए,
तो दुनिया में रंगीनिया बढ़ जाएगी,
खुशिया भी.

Seva kya hai? | सेवा क्या है?

🌲सेवा क्या है? 🌲 सेवा कर्म काटने का माध्यम है। सेवा आपके मन को विनम्र बनाती है। तन को चुस्त रखती है। मन में स्थिरता का माहौल पैदा करती...